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क्या लेसिक सर्जरी सुरक्षित है? फायदे, जोखिम और जरूरी सावधानियां
क्या लेसिक सर्जरी सुरक्षित है? फायदे, जोखिम और जरूरी सावधानियां5 May 2026

क्या लेसिक सर्जरी सुरक्षित है? फायदे, जोखिम और जरूरी सावधानियां

कंटूरा विजन और लेसिक में क्या अंतर है, दोनों के फायदे, सीमाएं, लागत और किस मरीज के लिए कौन सा विकल्प बेहतर है, जानें।

यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। आंखों से जुड़ा कोई भी निर्णय लेने से पहले योग्य नेत्र विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें।

जब कोई व्यक्ति पहली बार लेसिक सर्जरी के बारे में सुनता है, तो उसके मन में सबसे पहला सवाल अक्सर यही आता है, “क्या यह सच में सुरक्षित है?” कुछ लोग अपने दोस्तों या रिश्तेदारों से अच्छे अनुभव सुनते हैं, जबकि कुछ लोग इंटरनेट पर संभावित जोखिमों के बारे में पढ़कर डर जाते हैं। ऐसे में भ्रम होना स्वाभाविक है।

आंखें शरीर का बेहद संवेदनशील हिस्सा हैं। इसलिए किसी भी सर्जरी को लेकर चिंता होना सामान्य बात है। यही कारण है कि बहुत से लोग वर्षों तक चश्मा पहनते रहते हैं, लेकिन सर्जरी का निर्णय लेने में समय लगाते हैं।

लेसिक सर्जरी को दुनिया भर में दृष्टि सुधारने की एक प्रचलित प्रक्रिया माना जाता है। आधुनिक तकनीकों और बेहतर जांच प्रक्रियाओं के कारण इसकी सुरक्षा पहले की तुलना में काफी बेहतर हुई है। फिर भी यह समझना जरूरी है कि कोई भी चिकित्सकीय प्रक्रिया पूरी तरह जोखिम रहित नहीं होती। सही जानकारी और वास्तविक उम्मीदें यहां सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

लेसिक सर्जरी को सुरक्षित क्यों माना जाता है?

पिछले कई वर्षों में आंखों की लेजर तकनीक में काफी बदलाव आया है। पहले जहां प्रक्रियाएं सीमित थीं, वहीं अब अधिक सटीक मशीनों और उन्नत जांच पद्धतियों का उपयोग किया जाता है।

अधिकतर मामलों में लोगों को सर्जरी के बाद दृष्टि में अच्छा सुधार महसूस होता है। कई लोग वर्षों तक बिना चश्मे के सामान्य जीवन जी पाते हैं। यही कारण है कि इसे एक प्रभावी प्रक्रिया माना जाता है।

हालांकि सुरक्षा केवल मशीनों पर निर्भर नहीं करती। इसमें कई बातें महत्वपूर्ण होती हैं:

  • सही मरीज का चयन

  • आंखों की विस्तृत जांच

  • अनुभवी डॉक्टर

  • सर्जरी के बाद सही देखभाल

यदि इन बातों पर ध्यान दिया जाए, तो जोखिम काफी कम हो सकता है।

क्या हर व्यक्ति के लिए यह प्रक्रिया सुरक्षित होती है?

नहीं। यही सबसे महत्वपूर्ण बात है जिसे समझना जरूरी है।

बहुत से लोग यह मान लेते हैं कि यदि किसी परिचित ने लेसिक करवाई है, तो वे भी आसानी से करवा सकते हैं। लेकिन हर व्यक्ति की आंखें अलग होती हैं।

कुछ लोगों में आंखों की बनावट, कॉर्निया की स्थिति या अन्य स्वास्थ्य कारणों से यह प्रक्रिया उपयुक्त नहीं मानी जाती।

इसी कारण सर्जरी से पहले आंखों की विस्तृत जांच की जाती है।

सर्जरी से पहले कौन सी जांच जरूरी होती है?

लेसिक कराने से पहले डॉक्टर कई तरह की जांच करते हैं। इनका उद्देश्य केवल नंबर मापना नहीं होता, बल्कि यह समझना होता है कि आंखें इस प्रक्रिया के लिए सुरक्षित हैं या नहीं।

जांच के दौरान सामान्यतः इन बातों पर ध्यान दिया जाता है:

कॉर्निया की मोटाई

यदि कॉर्निया बहुत पतली हो, तो सर्जरी हर व्यक्ति के लिए सुरक्षित नहीं मानी जाती।

नंबर की स्थिरता

यदि चश्मे का नंबर लगातार बदल रहा हो, तो भविष्य में दृष्टि दोबारा प्रभावित हो सकती है।

आंखों का सूखापन

कुछ लोगों को पहले से ही आंखों में सूखापन होता है। ऐसी स्थिति में सर्जरी के बाद असुविधा बढ़ सकती है।

रेटिना की स्थिति

आंख के भीतर मौजूद रेटिना की जांच भी महत्वपूर्ण होती है ताकि किसी छिपी हुई समस्या का पता चल सके।

सर्जरी के दौरान क्या दर्द होता है?

यह भी एक सामान्य चिंता होती है।

अधिकतर मामलों में आंखों में विशेष दवा डाली जाती है जिससे आंखें सुन्न हो जाती हैं। इसी कारण प्रक्रिया के दौरान दर्द महसूस नहीं होता। कुछ लोगों को हल्का दबाव महसूस हो सकता है, लेकिन तेज दर्द सामान्य नहीं माना जाता।

सर्जरी के बाद शुरुआती कुछ घंटों में:

  • हल्की जलन

  • पानी आना

  • चुभन

  • धुंधलापन

जैसी समस्याएं महसूस हो सकती हैं। यह स्थिति सामान्यतः अस्थायी होती है।

लेसिक सर्जरी के बाद कौन सी सामान्य समस्याएं हो सकती हैं?

हर व्यक्ति का अनुभव अलग हो सकता है। कुछ लोगों को बहुत जल्दी आराम मिल जाता है, जबकि कुछ लोगों को शुरुआती दिनों में थोड़ी परेशानी महसूस हो सकती है।

आंखों में सूखापन

यह सबसे सामान्य समस्याओं में से एक मानी जाती है। कई लोगों को कुछ समय तक आंखों में सूखापन महसूस हो सकता है।

डॉक्टर सामान्यतः इसके लिए विशेष दवाइयां देते हैं।

रोशनी के आसपास चमक दिखाई देना

कुछ लोगों को रात में वाहन चलाते समय रोशनी के आसपास चमक या घेरा दिखाई दे सकता है। अधिकतर मामलों में यह समस्या समय के साथ कम हो जाती है।

धुंधलापन

सर्जरी के तुरंत बाद दृष्टि पूरी तरह स्थिर नहीं होती। आंखों को ठीक होने में समय लगता है।

क्या गंभीर जोखिम भी हो सकते हैं?

हालांकि गंभीर समस्याएं दुर्लभ मानी जाती हैं, लेकिन किसी भी सर्जरी की तरह इसमें भी कुछ जोखिम संभव हो सकते हैं।

उदाहरण के लिए:

  • संक्रमण

  • दृष्टि में अपेक्षित सुधार न होना

  • अत्यधिक सूखापन

  • कॉर्निया से जुड़ी जटिलताएं

यही कारण है कि अनुभवी डॉक्टर और सही जांच बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है।

किन लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए?

कुछ स्थितियों में डॉक्टर अतिरिक्त सावधानी की सलाह देते हैं या सर्जरी टाल सकते हैं।

गर्भावस्था

इस दौरान शरीर में हार्मोन संबंधी बदलाव होते हैं, जो दृष्टि को प्रभावित कर सकते हैं।

मधुमेह

यदि मधुमेह नियंत्रित न हो, तो आंखों की स्थिति प्रभावित हो सकती है।

आंखों की पुरानी बीमारी

यदि पहले से कोई गंभीर नेत्र रोग हो, तो अतिरिक्त जांच जरूरी हो सकती है।

अत्यधिक सूखी आंखें

ऐसी स्थिति में सर्जरी के बाद परेशानी बढ़ सकती है।

सर्जरी के बाद किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

अच्छे परिणाम केवल सर्जरी पर निर्भर नहीं करते। सर्जरी के बाद की देखभाल भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है।

डॉक्टर सामान्यतः इन बातों की सलाह देते हैं:

  • आंखों को रगड़ने से बचें

  • दवाइयों का नियमित उपयोग करें

  • धूल और धुएं से दूरी रखें

  • कुछ दिनों तक आंखों पर पानी सीधे न डालें

  • लंबे समय तक स्क्रीन देखने से बचें

कई लोग जल्दी सामान्य जीवन में लौटना चाहते हैं, लेकिन आंखों को पूरी तरह ठीक होने के लिए समय देना जरूरी होता है।

क्या सर्जरी के बाद तुरंत साफ दिखाई देता है?

कुछ लोगों को पहले ही दिन सुधार महसूस होने लगता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आंखें पूरी तरह ठीक हो चुकी हैं।

दृष्टि को पूरी तरह स्थिर होने में कुछ समय लग सकता है। यह समय हर व्यक्ति में अलग हो सकता है।

क्या लेसिक के बाद दोबारा चश्मा लग सकता है?

कुछ लोगों को वर्षों तक चश्मे की जरूरत नहीं पड़ती। वहीं कुछ मामलों में भविष्य में हल्का नंबर वापस आ सकता है।

उम्र बढ़ने के साथ आंखों में प्राकृतिक बदलाव भी होते हैं। इसलिए बाद में पढ़ने वाला चश्मा लगना संभव हो सकता है।

क्या इंटरनेट पर दिखने वाली डरावनी बातें सही होती हैं?

इंटरनेट पर अक्सर लोग केवल खराब अनुभव साझा करते हैं, जिससे डर बढ़ सकता है। लेकिन हर व्यक्ति का अनुभव समान नहीं होता।

सिर्फ सोशल मीडिया या विज्ञापनों के आधार पर निर्णय लेना सही नहीं माना जाता। आंखों की जांच और विशेषज्ञ की राय सबसे अधिक महत्वपूर्ण होती है।

क्या सही डॉक्टर चुनना जरूरी है?

हाँ, यह सबसे महत्वपूर्ण बातों में से एक है।

सर्जरी से पहले केवल कीमत या विज्ञापन देखकर निर्णय नहीं लेना चाहिए। डॉक्टर का अनुभव, जांच प्रक्रिया और अस्पताल की सुविधाएं भी महत्वपूर्ण होती हैं।

सामान्य प्रश्न

क्या लेसिक पूरी तरह सुरक्षित है?

कोई भी सर्जरी पूरी तरह जोखिम रहित नहीं होती। हालांकि सही जांच और अनुभवी डॉक्टर के साथ इसे सामान्यतः सुरक्षित माना जाता है।

क्या सर्जरी के बाद आंखों की रोशनी कमजोर हो सकती है?

गंभीर समस्याएं दुर्लभ होती हैं, लेकिन किसी भी प्रक्रिया में कुछ जोखिम संभव हो सकते हैं।

क्या सर्जरी के बाद आराम जरूरी होता है?

हाँ। शुरुआती दिनों में आंखों को पर्याप्त आराम देना जरूरी माना जाता है।

क्या हर व्यक्ति लेसिक करवा सकता है?

नहीं। आंखों की स्थिति और स्वास्थ्य के आधार पर डॉक्टर तय करते हैं कि यह प्रक्रिया उपयुक्त है या नहीं।

निष्कर्ष

लेसिक सर्जरी बहुत से लोगों के लिए सुरक्षित और प्रभावी विकल्प साबित हो सकती है, लेकिन यह निर्णय सोच-समझकर लेना जरूरी है। केवल सुविधा या विज्ञापन देखकर सर्जरी करवाना सही तरीका नहीं माना जाता।

सही जानकारी, आंखों की विस्तृत जांच और अनुभवी नेत्र विशेषज्ञ की सलाह सुरक्षित निर्णय लेने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

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