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LASIK से पहले कौन-से टेस्ट होते हैं?
LASIK सर्जरी से पहले कई महत्वपूर्ण आंखों के टेस्ट किए जाते हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि आप इस प्रक्रिया के लिए उपयुक्त उम्मीदवार हैं। इस लेख में जानिए कॉर्नियल टोपोग्राफी, पैकीमिट्री, पुतली की जांच, ड्राई आई टेस्ट और अन्य जरूरी प्री-ऑपरेटिव टेस्ट की पूरी जानकारी
लेसिक सर्जरी के लिए योग्य उम्मीदवारों का चयन करने हेतु आई स्पेशलिस्ट कंसल्टेशन (Eye Specialist Consultation) के दौरान निम्नलिखित प्रमुख टेस्ट किए जाते हैं:
1. कॉर्नियल टोपोग्राफी (Corneal Topography / Pentacam)
यह लेसिक का सबसे महत्वपूर्ण टेस्ट माना जाता है। इसमें एक विशेष 3D स्कैनर की मदद से आपकी आंख के कॉर्निया (पारदर्शी बाहरी सतह) का एक डिजिटल नक्शा (Map) तैयार किया जाता है।
यह क्यों जरूरी है: इससे कॉर्निया के आकार, वक्रता (Curvature) और अनियममितताओं का पता चलता है। अगर किसी मरीज में केराटोकोनस (Keratoconus - कॉर्निया का असामान्य रूप से पतला या शंक्वाकार होना) जैसी बीमारी होती है, तो उसे लेसिक की सलाह नहीं दी जाती।
2. कॉर्नियल पैकीमिट्री (Corneal Pachymetry - कॉर्निया थिकनेस टेस्ट)
यह टेस्ट बताता है कि आपके कॉर्निया की मोटाई (Corneal Thickness) कितनी है।
यह क्यों जरूरी है: लेसिक सर्जरी के दौरान लेजर द्वारा कॉर्निया के कुछ टिशू को हटाकर उसका आकार बदला जाता है। एक सुरक्षित सर्जरी के लिए कॉर्निया की मोटाई कम से कम 490 से 500 माइक्रोन होनी चाहिए। अगर कॉर्निया बहुत पतला है, तो डॉक्टर लेसिक के बजाय ICL जैसे अन्य विकल्प दे सकते हैं।
3. रिफ्रैक्शन और विजन टेस्ट (Refraction and Vision Evaluation)
इस जांच में यह मापा जाता है कि आपकी आंख का सटीक नंबर कितना है। इसमें मायोपिया (निकट दृष्टि दोष), हाइपरोपिया (दूर दृष्टि दोष) और एस्टिगमैटिज़्म (बेलनाकार नंबर) की जांच की जाती है।
एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया: मरीज की उम्र 18 वर्ष से अधिक होनी चाहिए और पिछले 1 साल से उसका चश्मे का नंबर पूरी तरह से स्थिर (Stable) होना चाहिए।
4. प्यूपिलोमेट्री (Pupillometry - पुतली जांच)
इस टेस्ट में अंधेरे और उजाले दोनों परिस्थितियों में आपकी आंख की पुतली (Pupil) के आकार को मापा जाता है।
यह क्यों जरूरी है: अगर किसी मरीज की पुतली का आकार जरूरत से ज्यादा बड़ा है, तो लेसिक के बाद रात में गाड़ी चलाते समय लाइटों का फैलना (Glares) या हेलो (Halos) दिखने की समस्या हो सकती है।
5. डाइलेटेड फंडस एग्जामिनेशन (Dilated Retina Exam)
इस जांच के लिए आंखों में विशेष ड्रॉप्स डालकर पुतलियों को फैलाया जाता है। इसके बाद डॉक्टर लेंस की मदद से आपकी आंख के पिछले हिस्से यानी रेटिना (Retina) और ऑप्टिक नर्व की गहन जांच करते हैं।
यह क्यों जरूरी है: अधिक माइनस नंबर वाले मरीजों में रेटिना कमजोर होने या उसमें छेद (Phole/Tear) होने का खतरा रहता है। यदि रेटिना में कोई खराबी हो, तो लेसिक से पहले लेजर प्रक्रिया द्वारा रेटिना को ठीक किया जाता है।
6. शार्मर टेस्ट (Schirmer's Test - ड्राई आई टेस्ट)
इसमें एक बहुत पतली पेपर स्ट्रिप आपकी निचली पलक के पास रखी जाती है ताकि यह मापा जा सके कि आपकी आंखें कितना प्राकृतिक आंसू बनाती हैं।
यह क्यों जरूरी है: लेसिक के बाद कुछ समय के लिए सूखापन (Dry Eyes) बढ़ता है। अगर किसी को पहले से ही गंभीर 'ड्राई आई सिंड्रोम' है, तो सर्जरी से पहले उसका इलाज करना जरूरी होता है।
लेसिक प्री-ऑप चेकअप की तैयारी कैसे करें?
यदि आपने अपनी lasik surgery ke liye eligibility test कराने का मन बना लिया है, तो जांच के दिन इन बातों का ध्यान रखें:
कॉन्टैक्ट लेंस पहनना बंद करें: अगर आप सॉफ्ट कॉन्टैक्ट लेंस का उपयोग करते हैं, तो टेस्ट से कम से कम 1 हफ्ता पहले उनका इस्तेमाल बंद कर दें। यदि आप हार्ड या सेमी-सॉफ्ट लेंस पहनते हैं, तो उन्हें 2 से 3 हफ्ते पहले हटाना होता है। ऐसा इसलिए क्योंकि लेंस कॉर्निया का प्राकृतिक आकार अस्थायी रूप से बदल देते हैं।
साथ में किसी को लाएं: जांच के दौरान आंख में पुतली फैलाने वाली ड्रॉप्स डाली जाती हैं, जिससे 3-4 घंटे तक धुंधला दिखाई देता है। इसलिए स्वयं गाड़ी चलाकर न आएं।
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