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क्या लेसिक के बाद फिर से चश्मा लग सकता है?
क्या लेसिक के बाद फिर से चश्मा लग सकता है?20 May 2026

क्या लेसिक के बाद फिर से चश्मा लग सकता है?

जानें किन कारणों से लेसिक के बाद फिर से चश्मे की जरूरत पड़ सकती है, इसका जोखिम कितना है और इसे कैसे कम किया जा सकता है।

यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। आंखों से जुड़ा कोई भी निर्णय लेने से पहले योग्य नेत्र विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें।

लेसिक सर्जरी करवाने का सोचते समय लगभग हर व्यक्ति के मन में एक सवाल जरूर आता है, “क्या इसके बाद जिंदगी भर चश्मा नहीं लगेगा?” कई लोग यही उम्मीद लेकर सर्जरी करवाते हैं कि एक बार प्रक्रिया हो जाए, फिर कभी चश्मे की जरूरत नहीं पड़ेगी।

लेकिन वास्तविकता थोड़ी अलग हो सकती है।

बहुत से लोगों को सर्जरी के बाद लंबे समय तक साफ दिखाई देता है और उन्हें चश्मे की जरूरत नहीं पड़ती। वहीं कुछ लोगों को कई वर्षों बाद हल्का नंबर वापस महसूस हो सकता है। कुछ लोगों को उम्र बढ़ने के साथ पढ़ने वाला चश्मा लगने लगता है। यही कारण है कि सर्जरी से पहले सही जानकारी होना जरूरी माना जाता है।

लेसिक का उद्देश्य दृष्टि सुधारना होता है, लेकिन यह आंखों में उम्र के साथ होने वाले प्राकृतिक बदलावों को पूरी तरह रोक नहीं सकती।

क्या लेसिक हमेशा के लिए होती है?

यह सवाल सुनने में आसान लगता है, लेकिन इसका उत्तर हर व्यक्ति के लिए एक जैसा नहीं होता।

सर्जरी के दौरान कॉर्निया की बनावट में बदलाव किया जाता है ताकि रोशनी सही तरीके से आंख के भीतर पहुंच सके। यह बदलाव लंबे समय तक असर कर सकता है। कई लोग वर्षों तक बिना चश्मे के सामान्य जीवन जीते हैं।

लेकिन समय के साथ शरीर की तरह आंखों में भी बदलाव आते रहते हैं। इसलिए भविष्य में दृष्टि में हल्का बदलाव होना संभव हो सकता है।

क्या सर्जरी के बाद नंबर वापस आ सकता है?

कुछ लोगों में हल्का नंबर वापस महसूस हो सकता है। इसे लेकर घबराना जरूरी नहीं होता क्योंकि यह हर व्यक्ति में नहीं होता।

इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं:

  • आंखों का प्राकृतिक बदलाव

  • पहले बहुत अधिक नंबर होना

  • शरीर की अलग ठीक होने की प्रक्रिया

  • उम्र बढ़ना

कई बार व्यक्ति को केवल हल्का नंबर महसूस होता है, जबकि रोजमर्रा के काम बिना चश्मे के आसानी से होते रहते हैं।

पढ़ने वाला चश्मा क्यों लग सकता है?

यह वह बात है जिसे लेकर लोग अक्सर भ्रमित हो जाते हैं।

बहुत से लोग सोचते हैं कि यदि सर्जरी के बाद उन्हें पढ़ने वाला चश्मा लग गया, तो इसका मतलब सर्जरी असफल रही। लेकिन ऐसा जरूरी नहीं होता।

उम्र बढ़ने के साथ आंखों की पास की चीजों पर ध्यान केंद्रित करने की क्षमता धीरे-धीरे कम होने लगती है। यह एक सामान्य प्रक्रिया मानी जाती है।

आमतौर पर 40 वर्ष के बाद बहुत से लोगों को:

  • किताब पढ़ते समय

  • मोबाइल देखते समय

  • छोटे अक्षर पढ़ते समय

परेशानी महसूस होने लगती है।

यह बदलाव उन लोगों में भी हो सकता है जिन्होंने कभी लेसिक नहीं करवाई हो।

क्या हर व्यक्ति को बाद में चश्मा लग जाता है?

नहीं।

कई लोग वर्षों तक बिना चश्मे के अच्छी दृष्टि का अनुभव करते हैं। कुछ लोगों को केवल खास परिस्थितियों में चश्मे की जरूरत महसूस होती है, जैसे रात में वाहन चलाते समय या लंबे समय तक पढ़ते समय।

यह पूरी तरह व्यक्ति की आंखों और उम्र से जुड़े बदलावों पर निर्भर करता है।

क्या ज्यादा नंबर वाले लोगों में संभावना बढ़ जाती है?

कुछ मामलों में जिन लोगों का नंबर पहले बहुत ज्यादा होता है, उनमें भविष्य में हल्का बदलाव महसूस होने की संभावना अधिक हो सकती है।

हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि सर्जरी का फायदा नहीं होगा। कई लोगों को इसके बाद भी रोजमर्रा की जिंदगी में काफी सुविधा महसूस होती है।

क्या दोबारा सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है?

कुछ लोगों में भविष्य में अतिरिक्त सुधार प्रक्रिया पर विचार किया जा सकता है। लेकिन यह हर व्यक्ति के लिए जरूरी नहीं होती।

डॉक्टर इस बारे में निर्णय लेने से पहले कई चीजें देखते हैं:

  • कॉर्निया की स्थिति

  • वर्तमान नंबर

  • आंखों का स्वास्थ्य

  • पहली सर्जरी का परिणाम

कई मामलों में दोबारा प्रक्रिया की जरूरत ही नहीं पड़ती।

क्या उम्र बढ़ने से दृष्टि बदलना सामान्य है?

हाँ।

यह समझना बहुत जरूरी है कि आंखें भी शरीर का हिस्सा हैं। जैसे उम्र बढ़ने के साथ बाल सफेद होते हैं या त्वचा में बदलाव आते हैं, वैसे ही आंखों में भी प्राकृतिक परिवर्तन होते हैं।

इसी कारण कई लोगों की दृष्टि समय के साथ बदलती है, चाहे उन्होंने सर्जरी करवाई हो या नहीं।

क्या सर्जरी करवाने के बाद भी आंखों की जांच जरूरी होती है?

हाँ, बिल्कुल।

कुछ लोग सोचते हैं कि सर्जरी के बाद अब आंखों की जांच की जरूरत नहीं होगी। लेकिन नियमित जांच फिर भी महत्वपूर्ण मानी जाती है।

आंखों का स्वास्थ्य केवल नंबर तक सीमित नहीं होता। कई दूसरी समस्याएं भी समय के साथ विकसित हो सकती हैं।

क्या स्क्रीन देखने से नंबर वापस आ सकता है?

लंबे समय तक स्क्रीन देखने से आंखों में थकान और सूखापन महसूस हो सकता है, लेकिन केवल मोबाइल या लैपटॉप देखने से तुरंत नंबर वापस आ जाना सामान्य बात नहीं मानी जाती।

हालांकि आंखों को आराम देना हमेशा बेहतर माना जाता है।

क्या लेसिक करवाने का फैसला गलत हो सकता है?

यह पूरी तरह व्यक्ति की उम्मीदों पर निर्भर करता है।

यदि कोई व्यक्ति यह सोचकर सर्जरी करवाता है कि भविष्य में कभी कोई बदलाव नहीं होगा, तो उसे निराशा हो सकती है। लेकिन यदि व्यक्ति समझता है कि आंखों में उम्र के साथ प्राकृतिक बदलाव संभव हैं, तो वह परिणाम को अधिक वास्तविक तरीके से देख पाता है।

सर्जरी से पहले कौन सी बातें समझनी जरूरी हैं?

निर्णय लेने से पहले इन बातों को समझना जरूरी माना जाता है:

  • सर्जरी हर व्यक्ति में समान परिणाम नहीं देती

  • उम्र बढ़ने की प्रक्रिया जारी रहती है

  • भविष्य में हल्का नंबर आ सकता है

  • पढ़ने वाला चश्मा लगना सामान्य हो सकता है

सही जानकारी कई अनावश्यक डर और गलतफहमियों को कम कर सकती है।

क्या सर्जरी के बाद जीवन आसान हो सकता है?

बहुत से लोग बताते हैं कि सर्जरी के बाद उनकी रोजमर्रा की जिंदगी पहले से आसान महसूस होती है।

उदाहरण के लिए:

  • सुबह उठते ही चश्मा ढूंढने की जरूरत नहीं पड़ती

  • यात्रा में सुविधा महसूस होती है

  • खेलते समय आराम रहता है

  • बार-बार लेंस बदलने की परेशानी कम हो जाती है

हालांकि हर व्यक्ति का अनुभव अलग हो सकता है।

सामान्य प्रश्न

क्या लेसिक के बाद हमेशा के लिए चश्मा हट जाता है?

कई लोगों को लंबे समय तक चश्मे की जरूरत नहीं पड़ती, लेकिन उम्र के साथ बदलाव संभव हो सकते हैं।

क्या पढ़ने वाला चश्मा लगना सामान्य है?

हाँ। यह उम्र से जुड़ा सामान्य बदलाव माना जाता है।

क्या नंबर वापस आने का मतलब सर्जरी असफल होना है?

जरूरी नहीं। हल्का बदलाव कई कारणों से हो सकता है।

क्या दोबारा प्रक्रिया हो सकती है?

कुछ मामलों में अतिरिक्त सुधार प्रक्रिया पर विचार किया जा सकता है। इसका निर्णय डॉक्टर करते हैं।

निष्कर्ष

लेसिक सर्जरी के बाद बहुत से लोगों को वर्षों तक बेहतर दृष्टि का अनुभव होता है, लेकिन भविष्य में आंखों में कुछ बदलाव होना संभव हो सकता है। यही कारण है कि सर्जरी से पहले वास्तविक उम्मीदें रखना जरूरी माना जाता है।

सही जानकारी, आंखों की जांच और विशेषज्ञ की सलाह के साथ लिया गया निर्णय लंबे समय में अधिक संतोषजनक हो सकता है।

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