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LASIK Surgery के लिए कौन योग्य है और यह कैसे तय होता है?
लेसिक के लिए कौन योग्य है, यह उम्र, कॉर्निया, और आंखों की स्थिति पर निर्भर करता है। जानें क्या जांचें होती हैं और किसे सावधान रहना चाहिए।
अस्वीकरण: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से है। LASIK या किसी भी नेत्र शल्य प्रक्रिया से पहले किसी योग्य नेत्र विशेषज्ञ से व्यक्तिगत परामर्श ज़रूरी है। हर व्यक्ति की आंखों की स्थिति अलग होती है और निर्णय जांच के बाद ही लिया जाना चाहिए।
परिचय
किसी दोस्त ने LASIK कराई। चश्मा उतर गया। वह खुश है।और तब से मन में एक सवाल घूम रहा है "क्या मैं भी LASIK करा सकता हूं?" यह सवाल बहुत से लोगों के मन में आता है। और यह सोचना सही भी है।
लेकिन जो बात अक्सर लोग नहीं जानते वह यह है LASIK हर किसी के लिए नहीं होती। यह कोई एक साइज़ में सबको फिट होने वाली प्रक्रिया नहीं है। कुछ लोगों के लिए यह बिल्कुल उपयुक्त होती है। कुछ के लिए आंशिक रूप से। और कुछ के लिए बिल्कुल नहीं।तो यह कैसे तय होता है?
LASIK की योग्यता यह डॉक्टर कैसे तय करते हैं?
LASIK की योग्यता कोई एक पैमाने से नहीं तय होती। डॉक्टर कई बातें एक साथ देखते हैं उम्र, आंखों का नंबर, कॉर्निया की बनावट, आंखों का स्वास्थ्य, और शरीर की सामान्य स्थिति।
इनमें से एक भी बात अगर ठीक न हो, तो LASIK की जगह कोई और विकल्प सुझाया जाता है।यही कारण है कि सर्जरी से पहले की जांच इतनी ज़रूरी होती है।
उम्र पहली और सबसे ज़रूरी शर्त
LASIK आमतौर पर 18 साल से ऊपर की उम्र में होती है।इसकी वजह यह है कि किशोरावस्था में आंखों का नंबर अक्सर बदलता रहता है। सर्जरी तब ज़्यादा टिकाऊ होती है जब नंबर कम से कम एक से दो साल से स्थिर हो।
ऊपरी उम्र के बारे में कोई सख्त सीमा नहीं है। लेकिन जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, आंखों में और बदलाव भी आते हैं जैसे मोतियाबिंद की शुरुआत। ऐसे में डॉक्टर पहले यह देखते हैं कि LASIK उस उम्र में उचित है या नहीं।
आंखों का नंबर कितना हो तो LASIK हो सकती है?
आमतौर पर LASIK में मायोपिया (minus number), हाइपरोपिया (plus number), और एस्टिगमेटिज्म को ठीक किया जा सकता है। लेकिन नंबर की एक सीमा होती है।बहुत अधिक नंबर में LASIK संभव नहीं होती क्योंकि उसके लिए कॉर्निया से जितनी परत हटानी होगी, वह सुरक्षित नहीं होगी।
इसीलिए सिर्फ नंबर देखकर नहीं, बल्कि कॉर्निया की मोटाई देखकर यह तय होता है।
कॉर्निया की मोटाई सबसे अहम पैमाना
यह शायद LASIK योग्यता का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है।LASIK में कॉर्निया की सतह को reshape किया जाता है। इसके लिए कॉर्निया में से कुछ परत हटती है। अगर कॉर्निया पहले से पतला है, तो इतनी परत हटाना सुरक्षित नहीं होता।
यही कारण है कि Corneal Topography और Pachymetry जैसी जांचें की जाती हैं।इन जांचों में कॉर्निया का नक्शा बनता है, उसकी मोटाई नापी जाती है, और यह देखा जाता है कि उसकी बनावट में कोई असामान्यता तो नहीं।
अगर कॉर्निया पर्याप्त मोटा है तो LASIK पर विचार हो सकता है। अगर नहीं तो ICL जैसे दूसरे विकल्प सुझाए जाते हैं।
नंबर का स्थिर होना क्यों ज़रूरी है?
मान लीजिए किसी का नंबर हर छह महीने में बदल रहा है।ऐसे में LASIK करा भी लें तो कुछ समय बाद नंबर फिर आ सकता है। सर्जरी का फायदा कम हो जाता है।इसीलिए डॉक्टर पूछते हैं "पिछले दो साल में आपका नंबर बदला है?" और अगर हां, तो थोड़ा इंतज़ार करने की सलाह दे सकते हैं।
आंखों का सामान्य स्वास्थ्य
LASIK के लिए आंखें स्वस्थ होनी चाहिए।अगर किसी को Keratoconus है जिसमें कॉर्निया आगे की तरफ उभरने लगता है तो LASIK सुरक्षित नहीं होती। यह एक ऐसी स्थिति है जिसे जांच में देखा जाता है।
अगर आंखों में glaucoma है, यानी आंखों का दबाव अधिक है, तो सावधानी बरतनी होती है।
Retina से जुड़ी कोई समस्या हो, या आंख में पहले कोई गंभीर संक्रमण हुआ हो तो यह भी जांच का हिस्सा होता है।
शरीर की सामान्य स्थिति
कुछ बीमारियां और दवाइयां LASIK की योग्यता को प्रभावित कर सकती हैं।
जो लोग autoimmune बीमारियों से ग्रस्त हैं जैसे Lupus या Rheumatoid Arthritis उनमें healing ठीक से नहीं होती। ऐसे मामलों में LASIK का निर्णय सोच-समझकर लिया जाता है।
कुछ दवाइयां जैसे steroids भी healing को प्रभावित करती हैं।
Diabetes में भी डॉक्टर पहले यह देखते हैं कि sugar कितने समय से control में है।
गर्भावस्था और स्तनपान
जो महिलाएं गर्भवती हैं या स्तनपान करा रही हैं, उनके लिए LASIK इस समय उचित नहीं मानी जाती।इसकी वजह यह है कि इस दौरान शरीर में हार्मोन बदलते हैं जो आंखों के नंबर को भी प्रभावित कर सकते हैं। नंबर अस्थायी रूप से बदल सकता है और उस समय सर्जरी करना ठीक नहीं होता।
सूखी आंखें एक ज़रूरी जांच
जिन लोगों की आंखें पहले से बहुत सूखी रहती हों, उनमें LASIK के बाद यह समस्या और बढ़ सकती है।
इसीलिए Dry Eye Test भी pre-LASIK जांच का हिस्सा होती है। अगर सूखापन है तो डॉक्टर पहले उसका इलाज करते हैं, और फिर देखते हैं कि सर्जरी संभव है या नहीं।
जो लोग LASIK नहीं करा सकते उनके लिए क्या?
अगर जांच में पता चले कि LASIK आपके लिए उचित नहीं है तो निराश होने की ज़रूरत नहीं।दूसरे विकल्प हैं।
ICL (Implantable Collamer Lens) उन लोगों के लिए एक विकल्प हो सकती है जिनका कॉर्निया पतला है या नंबर बहुत अधिक है। SMILE एक अन्य laser procedure है जिसमें flap नहीं बनती। Contoura Vision कॉर्निया की अनियमितताओं को भी address करती है।कौन सा विकल्प किसके लिए सही है यह जांच के बाद तय होता है।
जो भ्रम अक्सर होते हैं
"जिसका नंबर कम है उसे LASIK ज़रूर हो सकती है" - नंबर कम होना ज़रूरी है लेकिन पर्याप्त नहीं। कॉर्निया की मोटाई और संरचना भी उतनी ही ज़रूरी है।
"एक बार जांच हो गई तो हमेशा के लिए रिपोर्ट काम आएगी" - नहीं। अगर जांच पुरानी है खासकर एक साल से ज़्यादा तो दोबारा जांच होनी चाहिए। आंखें बदलती रहती हैं।
"डॉक्टर ने 'नहीं' कहा तो LASIK कभी नहीं हो सकती" - ज़रूरी नहीं। कभी-कभी थोड़े इंतज़ार के बाद या किसी स्थिति के ठीक होने के बाद सर्जरी संभव हो सकती है। या कोई और विकल्प हो सकता है।
"जिस दोस्त को हुई, मुझे भी होगी" - हर किसी की आंखें अलग होती हैं। किसी और के अनुभव से अपनी योग्यता का अंदाज़ा लगाना ठीक नहीं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
LASIK के लिए minimum और maximum उम्र क्या है?
आमतौर पर 18 साल से ऊपर की उम्र में LASIK पर विचार किया जाता है। ऊपरी उम्र के लिए कोई एक तय सीमा नहीं है लेकिन उम्र के साथ मोतियाबिंद जैसी स्थितियां भी होती हैं जिनका ध्यान रखना होता है। डॉक्टर जांच के बाद बताते हैं कि आपकी उम्र और आंखों की मौजूदा स्थिति में LASIK उचित है या नहीं।
क्या बहुत अधिक नंबर में LASIK नहीं हो सकती?
बहुत अधिक नंबर में LASIK संभव नहीं होती क्योंकि उसके लिए जितनी कॉर्निया की परत हटानी होगी, वह सुरक्षित नहीं होगी। ऐसे में ICL जैसे विकल्प पर विचार किया जा सकता है। नंबर की सटीक सीमा हर व्यक्ति की कॉर्निया की मोटाई पर निर्भर करती है इसीलिए जांच ज़रूरी है।
LASIK के लिए जांच में क्या-क्या होता है?
जांच में आमतौर पर Corneal Topography यानी कॉर्निया का नक्शा, Pachymetry यानी कॉर्निया की मोटाई, Dry Eye Test, आंखों का दबाव, Retina की जांच, और नंबर की विस्तृत जांच शामिल होती है। यह सब मिलकर तय करता है कि LASIK संभव है, और अगर हां तो कौन सी विधि सबसे उपयुक्त रहेगी।
Keratoconus में LASIK क्यों नहीं होती?
Keratoconus में कॉर्निया पहले से कमज़ोर और अनियमित आकार का होता है। LASIK में कॉर्निया की और परत हटाई जाती है यह उस स्थिति को और बिगाड़ सकता है। इसीलिए Keratoconus में LASIK नहीं की जाती। ऐसे मामलों में Corneal Cross-Linking जैसे दूसरे उपचार या contact lens के विकल्प पर विचार किया जाता है।
अगर मैं LASIK के लिए योग्य नहीं हूं तो क्या कोई और विकल्प है?
हां। LASIK एकमात्र विकल्प नहीं है। ICL उन लोगों के लिए है जिनका कॉर्निया पतला है या नंबर बहुत अधिक है। SMILE एक अन्य laser procedure है। Contoura Vision कॉर्निया की बनावट के अनुसार काम करती है। कौन सा विकल्प आपके लिए सही है यह जांच के बाद डॉक्टर बताते हैं।
क्या मधुमेह में LASIK हो सकती है?
यह सीधे हां या ना में नहीं कहा जा सकता। अगर मधुमेह अच्छी तरह नियंत्रित है और आंखों पर कोई असर नहीं है, तो कुछ मामलों में LASIK पर विचार हो सकता है। लेकिन अगर blood sugar अनियंत्रित है या आंखों में Diabetic Retinopathy की शुरुआत है, तो LASIK उचित नहीं होती। डॉक्टर पूरी स्थिति देखकर बताते हैं।
निष्कर्ष
लेसिक के लिए कौन योग्य है इसका जवाब कोई checklist नहीं दे सकती। उम्र, नंबर, कॉर्निया की मोटाई और बनावट, आंखों का स्वास्थ्य, और शरीर की सामान्य स्थिति यह सब मिलकर तय करते हैं।और यह सब सिर्फ एक अच्छी जांच के बाद पता चलता है।
अगर आप सोच रहे हैं कि LASIK आपके लिए सही है या नहीं तो पहला कदम एक विस्तृत pre-LASIK जांच है। उसके बाद डॉक्टर से खुलकर बात करें। सवाल पूछें। और जानकारी के साथ फैसला करें।किसी और के अनुभव से अपनी योग्यता मत तय करिए। आपकी आंखें आपकी हैं और उनका जवाब भी आपकी जांच में है।